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Weather नो तपे में तपेंगे प्रदेश, कई जगह पर हुई बरिश


पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के चंबल और ग्वालियर के कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हुई। बाकी बचे जिलों का मौसम साफ रहा। साथ ही दिन में शाजापुर का तापमान सामान्य से काफी तेज रहा। बाकी बचे जिलों के तापमान में खास उतार चढ़ाव नही देखा गया। प्रदेश में सबसे अधिक तापमान की अगर बात करें तो, 45.0 डिग्री सेल्सियस तापमान प्रदेश के शाजापुर, दमोह और दतिया का दर्ज हुआ।


मध्यप्रदेश का तापमान


भोपाल का अधिकतम तापमान 42.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, इंदौर का अधिकतम तापमान 41.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जबलपुर का अधिकतम तापमान 43.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, ग्वालियर का अधिकतम तापमान 43.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।


छत्तीसगढ़ का तापमान


रायपुर में अधिकतम तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, बिलासपुर का अधिकतम 45.5 तापमान डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जगदलपुर का अधिकतम तापमान 42.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, अंबिकापुर का अधिकतम तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।



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सोशल मीडिया वैसे तो राजनीतिक, सामाजिक और मसालेदार मसलों पर गर्मागर्म बहस के लिए जाना ही जाता है। लेकिन बुधवार को इसकी तपिश कुछ ज्यादा ही रही। दरअसल, सिलसिला शुरू हुआ जेएनयू की छात्रा शेहला राशिद के उस ट्ववीट से जिसमें उन्होंने गुजरात से लेकर बंगाल और मध्य प्रदेश के बीजेपी नेताओं पर सेक्स रैकेट चलाने और ISI की जासूसी करने का आरोप लगाया। लेकिन इस ट्वीट पर गायक अभिजीत ने जो जवाब दिया वो बेहद आपत्तिजनक है। अभिजीत ने शेहला के चरित्र पर उंगली उठाते हुए भद्दी टिप्पणी लिख दी। बस फिर क्या था, आग में घी डल चुका था। अभिजीत ने भले ही ट्वीट डिलीट कर दिया लेकिन शेहला की शिकायत पर ट्विटर ने अभिजीत का अकाउंट ही सस्पेंड कर दिया। 


जैसे ही अभिजीत का अकाउंट सस्पेंड हुआ, गायक सोनू निगम उनके बचाव में उतर आए। एक के बाद एक 24 ट्वीट कर सोनू ने अपनी बात रखी।


सोनू ने लिखा कि अभिजीत की भाषा से कोई असहमति दर्ज करा सकता है लेकिन क्या शेहला का बीजेपी पर सेक्स रैकेट चलाने का आरोप भड़काऊ नहीं है ? अगर उनका अकाउंट डिलीट हो सकता है तो शेहला का क्यों नहीं। उन्होंने मीडिया पर अलग-अलग खेमों में बंटे होने का आरोप लगाया। अपनी भड़ास निकालने के बाद सोनू ने ट्विटर भी छोड़ दिया।


इस पूरे विवाद की जद में अरुंधति रॉय पर किया गया परेश रावल के वो ट्वीट भी आया, जिसमें उन्होंने अरुंधति को आर्मी जीप पर बांधने की बात कही थी।  ये ट्वीट इस एपिसोड की एक अहम कड़ी है। साथ ही पूरे दिन लाखों लोग अपने अपने तर्कों के साथ एक दूसरे को गलत ठहराते रहे। लेकिन बड़ा सवाल है, इससे हासिल क्या हुआ?


फेसबुक हो, ट्विटर या फिर कोई और सोशल प्लेटफॉर्म। हर मसले, विचारधारा, तर्कों पर लोग बंटे हुए ही होते हैं। ये संभव भी नहीं कि सब एक जैसा सोचें। लेकिन राजनीतिक विचारधारा की मतभिन्नता ने इस तकरार का स्तर गिरा दिया है। अब तो प्रतिस्पर्धा इस बात की होती है कि कौन कितना स्तरहीन हो सकता है और दुखद बात कि इससे हासिल कुछ नहीं होता। लेकिन जब सेेलिब्रिटीज और नामी हस्तियां इस विवाद में कूदती हैं तो इतना भर होता है कि कुछ लोगों को समय कट जाता है। 


बहरहाल, हमें सोचना ये है कि हम सोशल मीडिया का किस तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं। ये वही माध्यम है, जिसका बखूबी इस्तेमाल कर पीएम मोदी जनता के बीच अपनी पैठ स्थापित करने में कामयाब रहे थे। अच्छे और रचनात्मक विचारों को मिनटों में दुनिया में फैलाने के लिए भी इसका इस्तेमाल होता है। खबर के मोर्चे पर ये सबसे आगे रखता है। लेकिन गाली-गलौज, भद्दी टिप्पणियां, बेहूदा तर्क और नूरा कुश्ती का ये आलम क्या इशारा कर रहा है। ये लड़ाई अभी और तीखी होगी ? की-बोर्ड या मोबाइल पर अकेले बैठकर, पहचान छुपाकर अलग अलग हिस्सों में बैठे लोग छद्म लड़ाई लड़ते रहेंगे। कोई तलवार नहीं, कोई युद्ध का मैदान नहीं, लेकिन सब लहूहुहान होंगे।


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