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Weather हो सकती है झमाझम बारिश !

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के साथ राज्य के अन्य स्थानों पर शुक्रवार को भी बादल छाए रहे। मौसम विभाग ने आगामी 24 घंटों के दौरान बारिश की संभावना जताई है। उज्जैन, होशंगाबाद, जबलपुर संभागों के अलावा भोपाल, सीहोर, गुना स्थानों पर बारिश हो सकती है।


मध्य प्रदेश का तापमान


भोपाल का अधिकतम तापमान 28.7  डिग्री, इंदौर का अधिकतम तापमान 27.7 डिग्री, ग्वालियर का अधिकतम तापमान 32.7 डिग्री, जबलपुर का अधिकतम तापमान 31.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

 


छत्तीसगढ़ का मौसम


राजधानी रायपुर के साथ राज्य के कई जिलों में हल्की धूप रही, तो कहीं बारिश का सिलसिला जारी रहा। इसके अलावा प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश होने की संभावना है।

 


तापमान


रायपुर में अधिकतम तापमान 33.3 डिग्री, बिलासपुर का अधिकतम तापमान 33.1 डिग्री, जगदलपुर का अधिकतम तापमान 32.2 डिग्री, जबकि न्यूनतम तापमान 23.8 डिग्री दर्ज किया गया।

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गरीबी का "सियासी" गणित

जिसका कोई मकान नहीं वो गरीब, खुले में शौच करने वाला गरीब, जो बंधुआ मजदूरी करता हो वो गरीब, जिसके बच्चे स्कूल की बजाए काम पर जाते हो वो गरीब।


ये उस गाइडलाइन के कुछ बिंदु है, जो केंद्र सरकार ने गरीबी रेखा की सूची के लिए बनाई है। पूरी गाइडलाइन को देखे तो कुल 14 बिंदु है। जिसमें एक बिंदु ये भी है कि दो जोड़ी कपड़े पहनने वाला और दिन में एक टाइम के खाने से भी कम खाना खाने वाला बीपीएल सूची के लिए पात्र है। विधानसभा में बीपीएल सूची से नाम काटे जाने का मसला जब चर्चा में आया तो पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव ने ये तमाम बिंदु गिनाए। जब वो तमाम नियमों का जिक्र कर रहे थे तो सदन में मौजूद विधायक हैरानी जता रहे थे। ये वाकई में हैरानी की ही बात है कि आजादी के इतने सालों बाद भी गरीबों के लिए बनाए गए नियमों में कोई बदलाव नहीं है। खुद मंत्री भी मानते है कि नियमों में व्यापक बदलाव की जरूरत है।


ये गाइडलाइन और सरकार के विकास के दावों में विरोधाभास नजर आता है। एक तरफ कोशिश है कि खुले में शौच ना हो। मगर बीपीएल सूची में उसी का नाम जोड़ा जाएगा जो खुले में शौच जाता हो। दूसरा जिसके पास खुद का मकान ना हो मगर कुछ सालों पहले नवाचारों के तहत मकानों पर लिखी गई, इस इबारत की तस्वीर विरोधाभास पैदा करती है। दरअसल गरीब देश में प्रयोगशाला बन चुके है और गरीबों के मसले पर सिवाए प्रदर्शन और राजनीति के राजनीतिक दलों को कुछ सूझता नहीं है। सड़क पर उतरते है हंगामा करते है और बताने की कोशिश होती है कि उन्हें गरीबों की फिक्र है। नियमों को बदलना नई गाइडलाइन बनाना भी इन्हीं दलों के हाथ में है। इसकी वजह ये कि, ये गरीब दबाव समूह नहीं है जो अपनी आवाज उठा सके। तमाम हालातों पर एक शेर मौजूं है कि 'अजीब मिठास है मुझ गरीब के खून में भी, जिसे भी मौका मिलता है वो पीता जरुर है'।

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