खबरे सबसे तेज
Weather बारिश के बाद मौसम हुआ सुहाना


पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के भोपाल, इंदौर के जिलों में ज्यादातर स्थानो पर, वहीं उज्जैन के जिलों में कई जगहों पर बारिश हुई। इसके अलावा रीवा के जिलों में कुछ स्थानो पर बारिश हुई। बाकी शेष बचे प्रदेश का मौसम साफ रहा। वहीं बात की जाए अगर प्रदेश में सबसे अधिक तापमान की तो, 40 डिग्री सेल्सियस तापमान प्रदेश के नौगांव में दर्ज हुआ।


मध्यप्रदेश का तापमान

भोपाल का अधिकतम तापमान 38.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, इंदौर का अधिकतम तापमान 35.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जबलपुर का अधिकतम तापमान 36.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, ग्वालियर का अधिकतम तापमान 38.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।


छत्तीसगढ़ का तापमान

रायपुर में अधिकतम तापमान 37.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, बिलासपुर का अधिकतम 37.7 तापमान डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जगदलपुर का अधिकतम तापमान 32.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, अंबिकापुर का अधिकतम तापमान 35.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।

और भी..
Today's Issue

भोपाल में घरों की तस्वीरों पर चढ़ा सियासी रंग आपके सामने हैं। बात सियासी है तो बात तो दूर तलक जाएगी ही। दरअसल, घर-घर तक दस्तक देने के लिए बीजेपी ने ये तरीका चुना, जहां घर की दीवार पर लिख दिया गया कि ये घर बीजेपी का है, लेकिन इस दावे और प्रचार की जद में कांग्रेस नेताओं के घर भी आ गए, जिसके बाद कांग्रेस ने ऐतराज जताया है।


ख़ैर तो ये महज़ एक वाकया है, जो जनता के बीच पैठ बनाने की संगठन की कोशिशों की बताता है, लेकिन बड़ा सवाल है, क्या ज्यादा से ज्यादा सदस्य बनाने के लिए राजनीतिक दल अब किसी भी हद तक जा सकते हैं। क्या संगठन में जन स्वीकार्यता से ज्यादा अब सदस्यता की बात हो रही है ? बीते समय में हमने देखा किस तरह बीजेपी ने दुनिया में सबसे बड़ा राजनीतिक संगठन बनने के लिए मेगा अभियान चलाया। मध्य प्रदेश की बात करें तो 14 साल से सत्ता से बाहर कांग्रेस ने भी कुनबा बढ़ाने के लिए जी जान लगा दी। 


इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि बदलते सियासी तौर तरीकों के बीच राजनीतिक विचारधारा में भी बड़ा बदलाव आया है। सत्ताधारी पार्टी से करीबी बनाने के लिए भी बड़ी संख्या पॉलिटिकल ट्रैफिक विचरण करता रहता है। यही वजह है कि जो मूल कार्यकर्ता हैं, उनकी अनदेखी होती है। राजनीतिक दलों के सामने एक बड़ी चुनौती जल्द से जल्द नेता बनने की चाह और कार्यकर्ताओं की कमी भी है। लंबे संघर्ष के बाद नेतृत्व संभालने की परंपरा टूटती जा रही है।


बहरहाल, ये दौर चुनावी राजनीति का है, जहां जीत-हार ही कामयाबी की कसौटी है और यही वजह है कि राजनीतिक दल और विचारधारा इससे अछूते नहीं हैं।



पूर्ण वीडियो देखने के लिए क्लिक करें


और भी..
आज का सवाल

नतीजा            पिछला सवाल

क्या परीक्षाओं में सिर्फ अच्छे अंक लाना ही सफलता की कुंजी है?


         

शेयर बाजार
Share Market BSE

Share Market NSE
मध्य प्रदेश
खबरें शहरो से
छत्तीसगढ़

Follow Us

       
विज्ञापन के लिए संपर्क करे
x