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Weather मौसम ने ली करवट, दिन में तेज धूप, शाम को बारिश

भोपाल : मंगलवार को भोपाल के मौसम ने एक बार फिर करवट बदली। दिनभर जहां सूरज की तपिश ने लोगों को परेशान किया। वहीं शाम होते ही राजधानी में एक बार फिर तेज बारिश देखने को मिली। मौसम विभाग की मानें तो प्रदेश में लगातार आ रही नमी के चलते अगले कुछ दिन इसी तरह के हालात रहने की उम्मीद है। वहीं विदर्भ में ऊपरी हवा का चक्रवात सक्रिय है, जिसके चलते प्रदेश के पांच जिलों बैतूल, होशंगाबाद सिवनी, बालाघाट और नरसिंहपुर में मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

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जनप्रतिनिधि v/s जनसेवक !

मध्य प्रदेश में जनप्रतिनिधि और ब्यूरोक्रेट्स एक बार फिर आमने-सामने हैं। कहीं जनप्रतिनिधियों ने अफसरों पर भ्रष्ट होने का आरोप लगाया, तो कभी अफसरों ने उठाए सवाल और जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाने का आरोप लगाया। लेकिन सवाल ये उठता है कि ऐसा हो क्यों रहा है, क्या अधिकारी अपनी सीमा लांघ रहे हैं, या फिर जनप्रतिनिधि तवज्जों नहीं मिलने से खफा हैं ?



नरसिंहपुर, पन्ना और शाजापुर में कलेक्टरों के तबादले के बाद कहीं उनकी वापसी के लिए प्रदर्शन हो रहे हैं। तो कहीं कलेक्टर रहते किए गए बेहतर कामों की बदौलत वो इन अधिकारियों को भूल नहीं पा रहे हैं। लेकिन अधिकारियों के लिए हो रहे इन प्रदर्शनों और महिमामंडन ने सरकार को असहज कर दिया है।


ये तो बात हुई 3 कलेक्टरों के तबादले के विरोध में उतरी जनता की। अब ज़रा मामले को और आगे लिए चलते हैं। बीते कुछ दिनों से मध्य प्रदेश में ब्यूरोक्रेसी लगातार सुर्खियों में है। जनप्रतिनिधियों और सीनियर अफसरों के बीच तकरार की खबरें खूब सुर्खियां बटोर रही हैं। नरसिंहपुर कलेक्टर से मंत्रालय में उपसचिव बने सीबी चक्रवर्ती ने अपने फेसबुक वॉल पर लिखा कि 'अगर कथित बुद्धिजीवियों ने आईएएस से घृणा की बजाय भ्रष्टाचार से घृणा की होती तो अब तक भ्रष्टाचार कम हो चुका होता'। हालांकि इस पर गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि बयानबाजी करने के शौकीन कलेक्टर नौकरी छोड़कर राजनीति में आ जाएं।



राजनेताओं की तरफ से अक्सर ऐसे बयान आते हैं, जहां ब्यूरोक्रेसी पर निशाना साधा जाता है और दूसरा ही मंजर है। जहां कलेक्टरों के तबादले पर 10-10 हजार को भंडारे में खाना खिलाया जा रहा है। वैसे ये कोई नई बात नहीं, पहले भी अच्छा काम करने वाले कलेक्टर-एसपी को जिले की जनता दुलार देती रही है। लेकिन कहीं अब राजनेताओं को ऐसा तो नहीं लगने लगा है कि जो तवज्जो और श्रेय उन्हें मिलना चाहिए वो अधिकारियों को मिल रहा है। खैर, विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के अपने-अपने दायरे हैं। इनमें जितना बेहतर तालमेल रहेगा, लोकतंत्र उतने प्रभावी तरीके से काम करेगा।

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छतरपुरः म.प्र. में जननी सुरक्षा योजना वाकई में दम तोड़ चुकी है। जननी सुरक्षा के वाहनों की लापरवाही जननियों की जान से खिलवाड़ कर रही है। छतरपुर में एकबार फिर मामला सामने आया जहां जननी सुरक्षा का वाहन नहीं पहुंचा तो जननी को प्रसव के लिए छह किमी पैदल चलना पड़ा।


जो सिस्टम की नाकामी है। ऐसा सिस्टम जो आम आदमी के लिए काम करता नजर तो आता है मगर करता कुछ नहीं है। इसी सिस्टम का शिकार संध्या यादव हुई, जिसे प्रसव पीड़ा हुई तो अस्पताल तक जाने के लिए छह किमी पैदल चलना पड़ा। वो भी इस दलदली भरे रास्ते से आशा कार्यकर्ता हरीबाई ने जननी एक्सप्रेस को कई बार फोन लगाया मगर कोई सहायता नहीं मिली। 


नजारा नया नहीं है, नरसिंहपुर में जननी एक्सप्रेस की लापरवाही के चलते एक महिला को साइकिल रिक्शा खींचना पड़ा था। जननी एक्सप्रेस का समय पर ना पहुंचना कई महिलाओं की जान मुश्किलों में डाल रहा है इस मामले में भी केवल जांच का रटा रटाया जवाब दिया जा रहा है।


समरेठा से सरकना मुख्य मार्ग तक करीब छह किमी सड़क जरा सी बरसात होने पर दलदल में तब्दील हो जाती है। ऐसे में यहां से गुजरने वाले राहगीरों को काफी परेशानियों से होकर रास्ता तय करना पड़ता है। 11 अगस्त को ग्रामीणों ने बड़ामलहरा तहसील मुख्यालय पर जाकर रोड को  मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना से जोड़ने की मांग उठाई थी लेकिन उसके बाद भी समस्या का कोई हल नहीं निकला।


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